Butterflies
Monday, 25 January 2016
Sunday, 24 January 2016
अनामिक ओढ
अनामिक ओढ
अस्वस्थ मी अशांत का कसली अनामिक ओढ ही
सांगेल का मजला कुणी सांगेल का मजला कुणी
कळते मला हे
व्यर्थ ते
सुख
दुखः
असते
जीवनी
नाराजी ना दुःखामुळे मन सुखेहि ना उचंबळते
मग काय जे छळते असे कसले अनामिक हे पिसे
मग काय जे छळते असे कसले अनामिक हे पिसे
सांगेल का मजला कुणी सांगेल का मजला कुणी
किती पालथी ती देऊळे सत् संग आणिक कीर्तने
दान-धर्म श्रमदान ही काय किती करु पाहिले
त्या पोकळीला बुजविण्या किती काय केले पामरे
मित्र नाती छंदातहि रे सतत गुंतुनी घेतले
मित्र नाती छंदातहि रे सतत गुंतुनी घेतले
पण त्यांच्या ही नादात तो नाद अनाहत गुंजतो
बाहेर का कुणी छेडते का आतुनी तो रुंजतो
मग जाऊनिया
बैसले
माझ्या मनाच्या अंतरी
दुर्लक्षिण्या त्या ओढीला त्या वेडाला करण्या दुरी
हास्य अचानक किणकिणले मजलाच कुणी का ते हसले
वेडीस काहीहि ना कळले पण हास्यातची
त्या गुंगुन गेले
त्या अथांग डोही डुंबले त्या नाद जली विरघळले
त्या नाद सुगंधी हरवुनिया मग नाद तरंगच जाहले
अन् नाद तो संवाद तो विश्वंभराशी साधता
रहस्य ह्या विश्वातले निमिषात एका उलगडता
कुठे ओढ अन् काय पिसे मजला न काही जाणवले
कोलाहलातहि जगण्याच्या शांत निवांत मग झाले
रश्मि २४/१/२०१६
Monday, 8 June 2015
झुला.........
प्रत्येकाचा झुला वेगळा
झुलणे परि कोणास ना टळे
झुलणे किती कसे नि कुठवर
नाहि उमगले कोणा आजवर
पण उमजुनी सत्यार्थ जो झुले
त्याचे झुलणे बकुळ फुले
रश्मि ७/६/२०१
झुला
असंख्य रूपे ह्या झूल्याची
काही दिसती कही न दिसती
मऊ उबदार हात झूला तो
अंगाई गीते गतो
पाळणाहि तो झुलाच असतो
अश्वासक आंदोळण घेतो
बागेमध्धे फळी लाकडी
किंवा टायर वा साडी
मागे पुढती वरती खाली
मुले सर्व गोळा झाली
पडवीमधला झोपाळा तो
सर्वांगाने कुरकुरतो
गाठि शिदोरी संस्कारांची
मूल्यांची बांधुन देतो
आशा निराशा धडपडणे अन
मस्तीत धुंदित वावरणे
तारुण्याचा झुला खरोखर
न दिसे तरि तो अनुभवणे
सायंकाळी कातरवेळी
झुला आपुल्यापरि झुलतो
हळुवार मंद खुर्चीसंगे
मागे पुढती जोजवितो
जीवन हे तर रूप झुल्याचे
जगणे म्हणजे हिंदोळे
जगणे म्हणजे झुलत रहाणे
झुलत झुलत गाणे गाणे
झुलत झुलत गाणे गाणे
रश्मि ६/६/२०१५
Monday, 13 April 2015
Our minds are distant galaxies
With stars being born every sec
The stars and sparks are seen outside
The turmoil remains hidden inside
Rashmi
9-4-15
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The yawing deep void
The emptiness
The nothingness
Staring trying to swallow
Struggle not
Oh poor destitute soul
Let it engulf !
Let it take you
To that distant land
The Destination !
Rashmi
13-4-2015
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With stars being born every sec
The stars and sparks are seen outside
The turmoil remains hidden inside
Rashmi
9-4-15
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The yawing deep void
The emptiness
The nothingness
Staring trying to swallow
Struggle not
Oh poor destitute soul
Let it engulf !
Let it take you
To that distant land
The Destination !
Rashmi
13-4-2015
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Sunday, 8 February 2015
Thursday, 26 September 2013
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